बच्चों के दिमाग की बनावट को नुकसान पहुंचा रहे बेबी वाइप्स, हो सकते हैं बेहद ‘खतरनाक’- स्टडी


बेबी वाइप्स को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. एक रिसर्च में पाया गया है कि बेबी वाइप्स का इस्तेमाल बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है. इसमें (Baby Wipes) इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स कई तरह की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं.

रिसर्च में बताया गया है कि बेबी वाइप्स में खुशबू और रंग के लिए कई केमिकल्स इस्तेमाल होते हैं, जो शरीर के लिए बेहद हानिकारक होते हैं. हाल ही में आई स्टडी में बताया गया है कि इस तरह के केमिकल्स ऑटिज्म और मल्टीपल स्केलेरोसिस का कारण बन सकते हैं. इतना ही नहीं हैंड सोप से हाथों की सफाई करना भी खतरे से कम नहीं है.

रिसर्च में बताया गया है कि बेबी वाइप्स में खुशबू और रंग के लिए कई केमिकल्स इस्तेमाल होते हैं, जो शरीर के लिए बेहद हानिकारक होते हैं. हाल ही में आई स्टडी में बताया गया है कि इस तरह के केमिकल्स ऑटिज्म और मल्टीपल स्केलेरोसिस का कारण बन सकते हैं. इतना ही नहीं हैंड सोप से हाथों की सफाई करना भी खतरे से कम नहीं है.

इस स्टडी के मुताबिक, बेबी वाइप्स के अलावा नेल पॉलिश, हैंड सोप और सफाई वाले केमिकल्स में ऑर्गेनोफॉस्फेट फ्लेम रिटार्डेंट्स और क्वाटरनरी अमोनियम कंपाउंड जैसे केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है. जो दिमाग की नसों को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं और ऑटिज्म और मल्टीपल स्केलेरोसिस का खतरा बढ़ाते हैं.

इस स्टडी के मुताबिक, बेबी वाइप्स के अलावा नेल पॉलिश, हैंड सोप और सफाई वाले केमिकल्स में ऑर्गेनोफॉस्फेट फ्लेम रिटार्डेंट्स और क्वाटरनरी अमोनियम कंपाउंड जैसे केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है. जो दिमाग की नसों को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं और ऑटिज्म और मल्टीपल स्केलेरोसिस का खतरा बढ़ाते हैं.

जर्नल ऑफ नेचर न्यूरोलॉजी में पब्लिश इस रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया कि सही तरह न चल-फिर पाने वाले बच्चों की विशेष देखभाल की जाती है. उनके यूरीन में अन्य बच्चों की तुलना में दो तरह के केमिकल ज्यादा पाए गए हैं, जो न सिर्फ दिमाग की बनावट को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि तंत्रिकाओं को भी नष्ट करने लगते हैं, जिससे बच्चे में ऑटिज्म और मल्टीपल स्केलेरोसिस का जोखिम बढ़ जाता है.

जर्नल ऑफ नेचर न्यूरोलॉजी में पब्लिश इस रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया कि सही तरह न चल-फिर पाने वाले बच्चों की विशेष देखभाल की जाती है. उनके यूरीन में अन्य बच्चों की तुलना में दो तरह के केमिकल ज्यादा पाए गए हैं, जो न सिर्फ दिमाग की बनावट को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि तंत्रिकाओं को भी नष्ट करने लगते हैं, जिससे बच्चे में ऑटिज्म और मल्टीपल स्केलेरोसिस का जोखिम बढ़ जाता है.

इन खतरनाक केमिकल्स की बात करें तो पहला OFR और दूसरा QAC है. रिसर्च में बताया गया है कि ओएफआर ज्यादातर वस्तुओं को गैर-ज्वलनशील बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. जैसे नेल पॉलिश, फर्नीचर, कालीन, इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्रायर शीट. वहीं, क्यूएसी का इस्तेमाल कीटाणुओं को मारने में होता है. इसका इस्तेमाल साफ सफाई के सामान, शैंपू, सनस्क्रीन और बॉडी वॉश में ज्यादा होता है.

इन खतरनाक केमिकल्स की बात करें तो पहला OFR और दूसरा QAC है. रिसर्च में बताया गया है कि ओएफआर ज्यादातर वस्तुओं को गैर-ज्वलनशील बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. जैसे नेल पॉलिश, फर्नीचर, कालीन, इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्रायर शीट. वहीं, क्यूएसी का इस्तेमाल कीटाणुओं को मारने में होता है. इसका इस्तेमाल साफ सफाई के सामान, शैंपू, सनस्क्रीन और बॉडी वॉश में ज्यादा होता है.

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रिसर्च में बताया गया कि इन घरेलू वस्तुओं में पाए जाने वाले केमिकल दिमाग की नसों को गंभीर तौर पर नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं. स्टडी हेड डॉ. पॉल टेसर और उनकी टीम ने घरों में इस्तेमाल होने वाले सामानों में पाए जाने वाले 1,800 से ज्यादा केमिकल्स का विश्लेषण किया है, जो दिमाग की नसों के लिए हानिकारक हैं. इसलिए सलाह दी गई कि ऐसे प्रोडक्ट्स को बच्चों को लगाने से बचना चाहिए.

रिसर्च में बताया गया कि इन घरेलू वस्तुओं में पाए जाने वाले केमिकल दिमाग की नसों को गंभीर तौर पर नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं. स्टडी हेड डॉ. पॉल टेसर और उनकी टीम ने घरों में इस्तेमाल होने वाले सामानों में पाए जाने वाले 1,800 से ज्यादा केमिकल्स का विश्लेषण किया है, जो दिमाग की नसों के लिए हानिकारक हैं. इसलिए सलाह दी गई कि ऐसे प्रोडक्ट्स को बच्चों को लगाने से बचना चाहिए.

Published at : 27 Mar 2024 04:34 PM (IST)

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