ABP की खबर का असर… मोदी सरकार ने भी आखिरकार माना कि ‘हेल्थ ड्रिंक’ नहीं Bournvita



<p style="text-align: justify;">वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने ई-कॉमर्स कंपनियों को एक एडवाइजरी जारी की है. जिसमें उन्हें अपने पोर्टल और प्लेटफॉर्म पर बॉर्नविटा समेत कई ऐसे ड्रिंक जिन्हें ‘हेल्थ ड्रिंक’ के नाम पर बेचा जाता है, उन्हें इस कैटेगरी से हटाने का निर्देश दिया है. दरअसल, एबीपी के पब्लिकल प्राइम टाइम शो ‘पब्लिक इंटरेस्ट’ की खबर का असर हुआ है. कुछ दिन पहले पब्लिक इंटरेस्ट शो में इस मामला को उठाया गया था. जिसमें जगविंदर पटियाल ने प्रमुखता से इस मुद्दे को दिखाया था.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बॉर्नवीटा में तय सीमा से ज्यादा है चीनी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">NCPCR ने जब जब बॉर्नवीटा की जांच की तो उसमें पाया कि उसमें शुगर का लेवल तय सीमा से काफी ज्यादा है. जिसे पीने से उल्टा सेहत खराब हो सकती है. इस जांच के सामने आने के बाद सरकार ने यह फैसला सुनाया.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">मंत्रालय के नोटिफिकेशन के मुताबिक कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स एक्ट के मुताबिक &nbsp;एनसीपीसीआर (NCPCR) ने अपनी जांच में खास निर्देश दिए हैं कि फएसए एक्ट के तहत हेल्थ ड्रिंक की परिभाषा स्पष्ट नहीं दी गई है. इसलिए सभी ईकॉमर्स कंपनियों और पोर्टल को बॉर्नवीटा समेत सभी तरह के ड्रिंक एवं बेवरेजेस को हेल्थ ड्रिंक कैटेगरी से हटाना होगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हेल्&zwj;थ-एनर्जी ड्रिंक जूस पर भी रोक</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इसी महीने सरकार ने ईकॉमर्स कंपनियां जो हेल्थ और एनर्जेटिक ड्रिंक के नाम पर जूस बेचती है उनपर शिकंजा कसा है. सरकार ने ईकॉमर्स वेबसाइटों पर खास निर्देश दिए हैं वह हेल्थ और एनर्जी ड्रिंक के नाम पर जूस न बेंचे. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने कहा कि ईकॉमर्स कंपनियां अपनी वेबसाइट पर बेंचने वाले फूड प्रोडक्ट्स का सही तरीके से सेगमेंट करें.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">अगर प्रोडक्ट के बारे &nbsp;में सही जानकारी देंगे तो कस्टमर्स को गुमराह नहीं करना चाहिए. एनर्जी ड्रिंक की सेल हर साल 50 फीसदी सलाना की दर से तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. युवाओं ज्यादा इसका इस्तेमाल करते हैं. &nbsp;जोकि काफी ज्यादा चिंताजनक है. कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि यह एक गंभीर समस्या पैदा कर सकती है. एफएसएसएआई ने भी इसे गंभीर बताया है.&nbsp;</p>
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