जाने थैलेसीमिया का इलाज कैसे होता है। – GoMedii


अगर किसी भी व्यक्ति को एक स्वस्थ शरीर चाहिए तो इसके लिए सबसे जरूरी है कि शरीर में ऑक्सीजन युक्त स्वस्थ रक्त का प्रवाह सुचारू रूप से चलना चाहिए। हमारे पुरे शरीर में जो भी पौषक तत्व होते हैं वह रक्त के माध्यम से ही प्रवाहित होते हैं। लेकिन कई बार व्यक्ति को रक्त संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसके चलते कई शारीरिक समस्याएँ होने लगती है। थैलेसीमिया, रक्त संबंधित एक ऐसा ही रोग है जिसकी वजह से व्यक्ति को कई अन्य शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

 

 

 

 

 

यदि किसी व्यक्ति को थैलेसीमिया है, तो उसका शरीर कम स्वस्थ हीमोग्लोबिन प्रोटीन का उत्पादन करता है, और उसकी अस्थि मज्जा (Bone marrow) कम स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करती है। लाल रक्त कोशिकाओं के कम होने की स्थिति को एनीमिया कहा जाता है। चूंकि लाल रक्त कोशिकाएं (blood cells) आपके शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, इसलिए अपर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं आपके शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीजन से वंचित कर सकती हैं, जिनकी उन्हें ऊर्जा बनाने और पनपने के लिए आवश्यकता होती है। इन सभी स्थितियों के परिणामस्वरूप व्यक्ति को कई शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

 

 

 

थैलेसीमिया के प्रकार। (Thalassemia types in hindi)

 

 

  • अल्फा थैलेसीमिया: थैलेसीमिया तब होता है जब कुछ या सभी अल्फा-ग्लोबिन जीन में समस्या होती है। आम तौर पर, प्रत्येक व्यक्ति में अल्फा ग्लोबिन के लिए चार जीन होते हैं। अल्फा थैलेसीमिया तब होता है जब अल्फा ग्लोबिन के निर्माण को नियंत्रित करने वाले एक या अधिक जीन अनुपस्थित या दोषपूर्ण होते हैं।
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  • बीटा थैलेसीमिया रोग: बीटा थैलेसीमिया तब होता है जब एक या दोनों बीटा-ग्लोबिन जीन में समस्या होती है। यह थैलेसीमिया का सबसे आम प्रकार है। बीटा थैलेसीमिया में, सामान्य वयस्क हीमोग्लोबिन (Hb A) का उत्पादन कम हो जाता है, जो जन्म से मृत्यु तक हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन का प्रमुख प्रकार है। बीटा थैलेसीमिया वाले लोगों में, हीमोग्लोबिन के निम्न स्तर से शरीर के कई हिस्सों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। बीटा हीमोग्लोबिन श्रृंखला बनाने में दो जीन शामिल होते हैं।

 

 

 

थैलेसीमिया के लक्षण क्या नज़र आते हैं ? (Thalassemia symptoms in Hindi)

 

 

थैलेसिमिया के लक्षण यदि किसी व्यक्ति में नजर आयें तो आपको तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. इसके लक्षणों में थकान, कमजोरी, पीलापन और धीमा विकास प्रमुख हैं. आइए अब थैलेसिमिया के लक्षणों पर एक नजर डालें –

 

 

  • विकास का अवरुद्ध होना

 

 

  • थैलेसिमिया में कमजोरी भी इसका एक आम लक्षण है

 

  • श्वसन संबंधी परेशानी

 

 

  • आयरन की अधिकता

 

 

 

थैलेसीमिया का इलाज कैसे होता है? (Thalassemia treatment in Hindi)

 

 

थैलेसीमिया का उपचार तीन तरीके से किया जाता है। कौन सा उपचार उस व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होगा इसका निर्णय डॉक्टर करते हैं। जो इस प्रकार है :

 

  • ब्लड ट्रांसफूजन (Frequent blood transfusions): थैलेसीमिया के बहुत गंभीर मामलों में अक्सर ब्लड ट्रांसफूजन की आवश्यकता होती है। थैलेसीमिया के मरीज को ब्लड ट्रांसफूजन कुछ हफ्तों में करवाना पड़ता है। समय के साथ, ब्लड ट्रांसफूजन आपके रक्त में आयरन का निर्माण करता है, जो आपके हृदय, लिवर और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके लिए आपको अपने डॉक्टर से नियमित जांच करवाते रहना चाहिए।
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  • केलेशन थेरेपी (Chelation therapy): इस थेरेपी में रक्त से अतिरिक्त आयरन को निकालने की प्रक्रिया की जाती है। नियमित ट्रांसफूजन के परिणामस्वरूप आयरन का निर्माण हो सकता है। थैलेसीमिया से पीड़ित कुछ लोग जिन्हें नियमित रूप से ट्रांसफूजन नहीं होता है, उनमें भी अतिरिक्त आयरन विकसित हो सकता है। अतिरिक्त आयरन को हटाना आपके स्वास्थ्य को बेहतर करने का एक तरीका है। मरीज के शरीर से अतिरिक्त आयरन को कम करने के लिए आपका डॉक्टर कुछ दवा लेने को भी कह सकते हैं।

 

  • स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (Stem cell transplant) : आपको बता दें की इसे बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी कहा जाता है, कुछ मामलों में स्टेम सेल ट्रांसप्लांट एक विकल्प हो सकता है। इस प्रक्रिया में एक डोनर से स्टेम कोशिकाओं को लिया जाता है और इसके लिए आपके परिवार में से किसी एक सदस्य को चुना जाता है।

 

 

 

थैलेसीमिया के इलाज के लिए अच्छे अस्पताल- (Best hospitals for Thalassemia treatment in Hindi)

 

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थैलेसीमिया के इलाज के लिए दिल्ली के अच्छे अस्पताल। (Best hospitals for Thalassemia treatment in Delhi)

 

 

 

थैलेसीमिया के इलाज के लिए मुंबई के अच्छे अस्पताल। (Best hospitals for Thalassemia treatment in Mumbai)

 

 

 

थैलेसीमिया के इलाज के लिए गुरुग्राम के अच्छे अस्पताल। (Best hospitals for Thalassemia treatment in Gurugram)

 

 

 

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थैलेसेमिया में रखें इन बातों का ध्यान – (Keep these things in mind in Thalassemia in Hindi)

 

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  • थैलेसेमिया के दौरान आपको गर्मी से बचना चाहिए।

 

  • खाने को अच्छे से पकाकर खाना चाहिए। कच्चे और अधपके भोजन का सेवन न करने से बचें।

 

  • हमेशा हल्का और ताजा भोजन खाएं।

 

  • दिनभर की कोई भी मील स्किप न करें।

 

  • ओवरइटिंग करने से भी आपको बचना चाहिए।

 

  • भोजन को अच्छे से चबा-चबाकर खाएं।

 

  • खाना खाने के बाद 5-10 मिनट जरूर टहलें।

 

  • कम से कम 8 घंटे की नींद जरूर लें।

 

 

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